कोटद्वार रेंज में पहाड़ी से गिरकर हथिनी की मौत, वन विभाग में मचा हड़कंप

कोटद्वार,   उत्तराखंड के लैंसडौन वन प्रभाग अंतर्गत कोटद्वार रेंज के मैती काटल क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। पहाड़ी से गिरने के कारण एक चार वर्षीय हथिनी की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हथिनी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया।

कोटद्वार रेंज के रेंज अधिकारी विपिन जोशी ने बताया कि बीते रोज ग्रामीणों से सूचना मिली थी कि मैती काटल क्षेत्र में एक हथिनी पहाड़ी से गिरकर मृत पड़ी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हथिनी अपने झुंड के साथ चल रही थी, तभी असंतुलित होकर पहाड़ी से नीचे गिर गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

पशु चिकित्सकों ने की पुष्टि

घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पशुचिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार और डॉ. कुमार सुबोध रंजन को बुलाया गया। उन्होंने हथिनी का पोस्टमार्टम कर यह पुष्टि की कि:

  • शव लगभग एक दिन पुराना था।

  • मृत्यु का कारण पर्वत से गिरना पाया गया।

डॉ. कुमार रंजन (पशुचिकित्साधिकारी, कलालघाटी) ने पुष्टि की कि मृत हथिनी की आंतरिक चोटें ही मृत्यु का कारण बनीं।

वन्यजीवों के लिए खतरा बनी भौगोलिक परिस्थितियां

यह घटना एक बार फिर से यह सवाल उठाती है कि हिमालयी भूभागों की जटिल और खतरनाक भौगोलिक स्थितियाँ, विशेष रूप से मानसून के दौरान, वन्यजीवों के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं। कई बार ऐसे हादसे पशु गलियों (animal corridors) में रास्ता भटकने या दल से बिछड़ने के कारण भी होते हैं।

अंतिम क्रिया पूरी, वन विभाग सतर्क

हथिनी के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद उसे नियमानुसार दफना दिया गया है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि झुंड के अन्य हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि प्राकृतिक गलियारों की निगरानी, विचलन रोकने के उपाय और स्थानीय समुदाय की सतर्कता में इज़ाफा किया जाए। इस तरह की घटनाएं न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि वन प्रबंधन की चुनौतियों को भी उजागर करती हैं।