सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष की वार्षिक कार्यशाला कैलेंडर का शुभारंभ किया
अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष की वार्षिक कार्यशाला कैलेंडर का सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने किया शुभारंभ अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के उपलक्ष में वर्ष भर आयोजित होंगे सहकारिता कार्यक्रम सहकारिता मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत उत्तराखंड में सहकारिता ने किसानों को दी नई दिशाएं 1 लाख बनी लखपति दीदी
उत्तराखंड में सहकारिता के क्षेत्र में अहम कदम उठाते हुए, सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य सहकारी संघ सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह कार्यशाला “कोऑपरेटिव बिल्ड ए बेटर वर्ल्ड” थीम पर आधारित थी और इसका आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के उपलक्ष्य में किया गया था। इस मौके पर मंत्री डॉ. रावत के साथ अपर सचिव/निबंधक सहकारिता सोनिका, नाबार्ड के जीएम सुमन कुमार और आईसीएम निदेशक अनिल तिवारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
कार्यक्रम में डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यशालाएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार किसानों और महिलाओं के लिए सहकारिता के माध्यम से नई दिशा दे रही है। प्रदेश में अब तक 10 लाख 22 हजार करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है, और हमारी सरकार ने 1 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में सफलता हासिल की है।”
डॉ. रावत ने प्रदेश में सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने इस दिशा में एक मॉडल अपनाया है, जिसे पूरे देश में अपनाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने प्रदेश के किसानों के लिए मिलेट्स मिशन योजना की सफलता को भी उजागर किया, जिसके अंतर्गत मंडुवे और झंगोरा की खरीद की दर 18 रुपये से बढ़कर अब 42 रुपये प्रति किलो हो गई है।
सहकारिता मंत्री ने आगामी कार्यों के बारे में बताते हुए कहा कि 30 मार्च तक 400 बहुउद्देशीय समितियां ग्राम सभा स्तर पर गठित की जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस कार्य में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “प्रदेश में अब तक 670 समितियां हैं और इस वर्ष हम इन समितियों के माध्यम से 10 लाख 50 हजार किसानों से सीधे जुड़ने का लक्ष्य रखते हैं।”
समीक्षा बैठक में उन्होंने 42 पहाड़ी ब्लॉकों में शत-प्रतिशत जैविक खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य भी रखा। साथ ही, सहकारिता के क्षेत्र में बेतरतीब विकास को रोकने के लिए उन्होंने समितियों के गठन को प्राथमिकता दी।
अपर सचिव एवं रजिस्ट्रार सहकारी समितियां सोनिका ने भी अपने संबोधन में सहकारिता वर्ष-2025 के आयोजन के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से सहकारी संस्थाओं की छवि को बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी समितियां सुचारू रूप से कार्य करें और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो।”
नाबार्ड के महाप्रबंधक सुमन कुमार ने सहकारी समितियों के सामाजिक समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण और सतत विकास में योगदान को सराहा। उन्होंने उत्तराखंड में सहकारिता के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों की भी प्रशंसा की।
कार्यक्रम के अंत में, उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक की पत्रिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन संयुक्त निबंधक मंगला त्रिपाठी ने किया, और धन्यवाद ज्ञापन अपर निबंधक आनंद शुक्ल ने किया।
इस अवसर पर प्रदेशभर से सहकारी बैंकों के शाखा प्रबंधक, सहकारी समितियों के सदस्य और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।