अर्धकुंभ को लेकर विवाद तेज: संत समाज के बयान से प्रशासन असमंजस में, अखाड़ा परिषद ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
हरिद्वार में अर्धकुंभ को पूर्णकुंभ या महाकुंभ का स्वरूप देने की तैयारी जहां शासन व प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है, वहीं अखाड़ों व आश्रमों से आ रहे विरोधाभासी बयान पूरे मेला प्रबंधन को असमंजस में डाल रहे हैं। लगातार उठ रहे सवालों ने न केवल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि संत समाज में भी तरह-तरह की चर्चाओं को हवा भी दे दी है।
बीते दिनों एक प्रमुख अखाड़े के शीर्ष संत ने कुंभ की तैयारियों पर गंभीर सवाल भी उठाए थे। इसके बाद प्रशासन ने सभी अखाड़ों के संतों के बयान रिकॉर्ड कर सार्वजनिक भी किए, ताकि उस संत के दावे — कि उन्हें न बुलाया गया, न चर्चा हुई — का खंडन किया जा सके। इसी बीच एक आश्रम में हुई बैठक में फिर कुछ साधुओं ने अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कुंभ व अखाड़ा परिषद के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए।
इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच गुरुवार को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी सामने आए। उन्होंने वीडियो बयान जारी कर इस विवाद को “वर्चस्व की लड़ाई” करार दिया व उन संतों पर निशाना साधा जो कुंभ की तैयारियों पर प्रश्न खड़े भी कर रहे हैं।
श्रीमहंत ने कहा कि अर्धकुंभ को महाकुंभ के रूप में आयोजित करने के लिए शासन को संत समाज का पूर्ण सहयोग भी प्राप्त है। उन्होंने दावा किया कि हरिद्वार का कुंभ प्रयाग की तरह भव्य व दिव्य रूप में संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की आलोचना व भ्रांतिपूर्ण बयानबाजी सनातन परंपरा के विरोध जैसा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग हाल के दिनों में “संत वेश धारण कर” केवल अपनी सुविधाएं व व्यवस्थाएं हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त ही नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रमुख अखाड़े व शासन ऐसे कुचक्रों को समझ चुके हैं जो सनातन संस्कृति के उत्थान में बाधा भी डालना चाहते हैं।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने बताया कि अखाड़ा परिषद हरिद्वार, नासिक व उज्जैन में होने वाले महाकुंभ की तैयारियों में जुटा है। इसके लिए सभी अखाड़ों के प्रतिनिधियों व संबंधित राज्य सरकारों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ में सभी अखाड़े भाग लेंगे, पेशवाई व शाही स्नान का आयोजन भी पूर्ण परंपरा के साथ किया जाएगा। उनका दावा है कि इस बार हरिद्वार कुंभ में 50 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना भी है, जिससे सनातन संस्कृति का परचम वैश्विक स्तर पर और ऊंचा भी होगा।
उधर, बुधवार को वायरल हुए एक वीडियो में कुछ आश्रमों के संतों ने अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी पर ही सवाल उठाए थे और कहा था कि “अर्धकुंभ कभी कुंभ ही नहीं हो सकता”। उन्होंने राज्य सरकार के निर्णय पर भी प्रश्न खड़े करते हुए अपनी अलग कार्यकारिणी घोषित करने की बात कही थी, जिसके बाद विवाद और भी गहरा गया है।