यमुना नदी का रुख बस्ती की ओर मोड़ने का आरोप, खरादी के ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग

उत्तरकाशी। खरादी क्षेत्र में यमुना नदी में कथित डायवर्जन व चैनलाइजेशन कार्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी बड़कोट को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि चैनलाइजेशन के नाम पर यमुना नदी के बहाव को आबादी की ओर मोड़ा जा रहा है, जिससे क्षेत्र में बाढ़ व कटाव का खतरा बढ़ सकता है।

ग्रामीणों के अनुसार नगाणगांव क्षेत्र में पोकलैंड मशीनों के जरिए नदी के भीतर कार्य भी किया जा रहा है। उनका आरोप है कि नदी के बीच से निकाले जा रहे मलबे को दोनों किनारों पर डाला भी जा रहा है, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित भी हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी का बहाव बदला गया तो खरादी बाजार, आसपास की बस्तियों व सरकारी परिसंपत्तियों को गंभीर नुकसान भी पहुंच सकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि अतीत में सरकार द्वारा खरादी क्षेत्र को बाढ़ व कटाव से बचाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य कराए गए थे। उनका कहना है कि यदि वर्तमान में नदी का रुख आबादी की ओर मोड़ा गया तो इन सुरक्षा कार्यों की प्रभावशीलता भी प्रभावित हो सकती है और सैकड़ों आवासीय व व्यावसायिक भवन खतरे की जद में भी आ सकते हैं।

स्थानीय लोगों ने वर्ष 2013 की आपदा का हवाला देते हुए प्रशासन से समय रहते हस्तक्षेप करने की मांग भी की है। उन्होंने मांग की कि मौके का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की जाए व नदी से निकाले गए मलबे को पूर्व में निर्मित सुरक्षा दीवारों के अनुरूप व्यवस्थित तरीके से डाला जाए, ताकि नदी का प्रवाह सुरक्षित दिशा में भी बना रहे।

ग्रामीणों ने यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल से भी मामले में हस्तक्षेप करने व क्षेत्रवासियों की चिंताओं का समाधान कराने की मांग भी की है। ज्ञापन सौंपने वालों में सोवेन्द्र सिंह, प्रमोद सिंह पयाल, प्रज्ञ रावत, कुलबीर रावत, राजेन्द्र रावत व मोहन सिंह पंवार सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।

वहीं, सिंचाई विभाग ने इन आरोपों से खुद को अलग भी बताया है। सिंचाई निर्माण खंड पुरोला के अधिशासी अभियंता पन्नी लाल ने कहा कि वर्तमान में विभाग की ओर से खरादी क्षेत्र में इस प्रकार का कोई कार्य ही नहीं कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व नदी के कुछ हिस्से में चैनलाइजेशन का कार्य भी किया गया था, लेकिन फिलहाल विभाग की ओर से वहां कोई गतिविधि संचालित भी नहीं की जा रही है। विभाग के इस बयान के बाद क्षेत्र में चल रहे कार्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं व ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग पर ही अड़े हुए हैं।