STF का बड़ा एक्शन: साइबर ठगी के ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क पर प्रहार, एक माह में 6 मुकदमे दर्ज, 10 आरोपी कानून के शिकंजे में
उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए म्यूल अकाउंट सिंडिकेट पर शिकंजा भी कस दिया है। 2 दिनों की ताबड़तोड़ कार्रवाई में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों में 4 नए मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि पिछले 1 माह के दौरान कुल छह मुकदमे दर्ज कर 10 नामजद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जा चुकी है।
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी आर्थिक रूप से कमजोर व मजदूर वर्ग के लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवा रहे थे या फिर उनके मौजूदा खातों की बैंकिंग सुविधाएं हासिल कर उनका इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए भी कर रहे थे।
जांच के दौरान एनसीआरपी पोर्टल, समन्वय पोर्टल, सीएफसीएफआरएमएस, आई4सी इनपुट्स, बैंकिंग रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही ‘मनी ट्रेल एनालिसिस’ के जरिए एक बड़े संगठित गिरोह का खुलासा भी हुआ, जो साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराकर करोड़ों रुपये की ठगी की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने का काम भी कर रहा था।
एसटीएफ के अनुसार इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, शेयर मार्केट फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड, टास्क फ्रॉड व अन्य साइबर अपराधों से अर्जित धनराशि की लेयरिंग (Layering) के लिए ही किया जा रहा था। इन खातों से जुड़े साइबर धोखाधड़ी के मामले बिहार, केरल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व तमिलनाडु समेत कई राज्यों में दर्ज पाए गए हैं।
तीन नई एफआईआर, चार आरोपी नामजद
08 जून को की गई कार्रवाई के तहत साइबर क्राइम थाना देहरादून व कुमाऊं में तीन नई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें 4 आरोपियों को नामजद किया गया है। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं व सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 66C व 66D के तहत मुकदमे भी दर्ज किए हैं।
बैंक खाता किराए पर देना भी अपराध
एसटीएफ ने आम जनता को चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी उपलब्ध कराना गंभीर अपराध की श्रेणी में ही आता है। कई लोग कमीशन या सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के झांसे में आकर अपने खाते उपलब्ध भी करा देते हैं, लेकिन ऐसे खातों में साइबर ठगी का पैसा आने पर खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई का सामना भी करता है।
एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि म्यूल अकाउंट्स व साइबर अपराध सिंडिकेट के खिलाफ यह अभियान आगे भी लगातार जारी ही रहेगा। संदिग्ध बैंक खातों की दोबारा जांच के साथ-साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों व संभावित बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच भी की जा रही है।