देहरादून में कारोबारी हत्याकांड: मां-बेटे के 15 साल पुराने विवाद ने ली अर्जुन की जान

राजधानी देहरादून में चर्चित कारोबारी अर्जुन शर्मा की हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे भी सामने आए हैं। पुलिस जांच के अनुसार अर्जुन व उनकी मां बीना शर्मा के बीच रिश्तों में दरार अचानक नहीं आई थी, बल्कि इसकी शुरुआत करीब 15 वर्ष पहले तब हुई जब अर्जुन ने पारिवारिक व्यवसाय संभालना भी शुरू किया। व्यवसायिक लेन-देन व संपत्ति को लेकर मतभेद धीरे-धीरे गहराते गए और आखिरकार यह विवाद खौफनाक अंजाम तक भी पहुंच गया।

गैस एजेंसी और प्रॉपर्टी विवाद बना कारण

अर्जुन के पिता, शहीद कर्नल रमेश चंद शर्मा के बलिदान के बाद परिवार को सरकारी कोटे से गैस एजेंसी आवंटित भी हुई थी। इसी संपत्ति के आधार पर Bank of Baroda से लगभग 8 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था, जिसे लेकर भी परिवार में तनाव ही था।

करीब 8 माह पहले जीएमएस रोड स्थित पैतृक संपत्ति का 14 करोड़ रुपये में सौदा डॉ. अजय खन्ना के साथ ही किया गया। इसमें से 4 करोड़ रुपये लोन चुकाने में लगाए गए, जबकि शेष 8 करोड़ रुपये बीना शर्मा के खाते में आए। आरोप है कि ये रकम अगले ही दिन उनके करीबी विनोद उनियाल को ट्रांसफर भी कर दी गई। इसी लेन-देन को लेकर अर्जुन बेहद नाराज थे और पैतृक संपत्ति में अपना आधा हिस्सा भी मांग रहे थे।

स्टे के बाद बढ़ा दबाव

संपत्ति सौदे में शर्त थी कि सौदा पूरा न होने पर रकम दोगुनी भी लौटानी होगी। अर्जुन द्वारा अदालत से स्टे लिए जाने के बाद सौदा अटक भी गया। पुलिस के अनुसार, डॉ. खन्ना की ओर से लगातार दबाव भी बनाया जा रहा था। इसी बीच बीना शर्मा, विनोद उनियाल व अन्य आरोपियों ने कथित रूप से अर्जुन को रास्ते से हटाने की साजिश भी रची।

करोड़ों के लेनदेन के मिले सबूत

जांच में बीना शर्मा के खाते से विनोद उनियाल को करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने के प्रमाण भी मिले हैं। अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने तहरीर में 20-25 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप भी लगाया था। पुलिस जांच में बड़े वित्तीय लेनदेन की पुष्टि भी हुई है।

हत्या स्थल के पास खड़ी थी कार

तिब्बती मार्केट के बाहर जहां अर्जुन को गोली मारी गई, वहां उनकी लाल रंग की कार भी खड़ी थी, जिसके नंबर में 786 अंक होने से लोगों में चर्चा भी रही। यह वाहन बीना शर्मा के नाम पर ही पंजीकृत बताया जा रहा है।

मेरठ से लाए गए थे हथियार

पुलिस मुठभेड़ में पकड़े गए शूटरों के पास से देसी तमंचे भी बरामद हुए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपियों के संबंध मेरठ से ही रहे हैं और वहीं से हथियार लाए गए थे।

सहारनपुर की खुलेगी पुरानी फाइल

मुख्य आरोपी राजीव का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालने के लिए सहारनपुर की पुरानी फाइलें भी खोली जाएंगी। जानकारी के अनुसार, उसने 1997 में हत्या का अपराध किया था और जेल गया था। साल 2001 में वह बरी हो गया था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उस समय की परिस्थितियों की दोबारा से जांच की जाएगी।

सगे भाई हैं आरोपी

राजीव व पंकज सगे भाई बताए जा रहे हैं और मूल रूप से पौड़ी क्षेत्र के निवासी हैं। परिवार के भीतर पहले भी हिंसक घटनाएं भी हो चुकी हैं। पुलिस पूरे आपराधिक इतिहास व पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच कर रही है।

इस सनसनीखेज हत्याकांड ने न केवल देहरादून बल्कि पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था व पारिवारिक विवादों के भयावह परिणामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की हर कड़ी को जोड़कर साजिश के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में भी जुटी है।