पिथौरागढ़ में भारी बर्फबारी से जनजीवन प्रभावित, आदि कैलाश मार्ग बंद, शीतकालीन पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा
सीमांत जिला पिथौरागढ़ में बीते दिनों हुई भारी बर्फबारी के चलते धारचूला से आदि कैलाश जाने वाली सड़क पर ढाई फुट से अधिक बर्फ भी जम गई है। बर्फबारी के कारण चीन सीमा के पास स्थित जिले के अंतिम गांव कुटी से आगे आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। शीतकाल में हर साल की तरह इस बार भी इस क्षेत्र में आवागमन बंद हो गया है। 4 दिन पहले हुई बर्फबारी से उच्च हिमालयी क्षेत्रों के माइग्रेशन गांव पूरी तरह बर्फ से ही ढक गए हैं।
व्यास घाटी के सात गांवों में भारी बर्फबारी
व्यास घाटी के बूंदी, गर्त्यांग, गुंजी, नपलच्यू, रांगकांग, नाबी व कुटी गांवों में बर्फ जमी हुई है। इनमें सबसे अधिक बर्फ कुटी गांव में दर्ज भी की गई है। सीमांत क्षेत्र धारचूला की दारमा घाटी में स्थित कुटी गांव 12,303 फीट की ऊंचाई पर ही स्थित है।
ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल ने बताया कि
गांव में करीब 2.5 फुट बर्फ जमा है, जबकि कुटी से आदि कैलाश सड़क पर 2 फुट से अधिक बर्फ होने के कारण न तो वाहन और न ही पैदल आवाजाही भी संभव है। दांतू, दुग्तू सहित घाटी के अन्य गांवों में भी बर्फबारी जारी ही है।
पंचाचूली शिखर दर्शन कर लौटे पर्यटक
दारमा घाटी में बर्फबारी के बीच भी पर्यटकों की आवाजाही देखने को भी मिली। होम स्टे संचालक संजय जंग व गुड्डू जंग ने बताया कि मंगलवार को हुई बर्फबारी के बावजूद सड़क खुली होने के कारण दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित पिथौरागढ़ व रुद्रपुर से करीब 40 से अधिक पर्यटक पंचाचूली शिखर का दर्शन कर भी लौटे।
पर्यटकों में पिथौरागढ़ के अमन जोशी, आशीष कुमार, दिल्ली के आनंद, धर्मशाला के अक्षित कुमार व उत्तर प्रदेश के विवेक शामिल रहे, जिन्होंने बर्फबारी का आनंद लेते हुए दारमा घाटी की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना भी की।
सड़क बनने से शीतकाल में भी जारी है आवागमन
कुछ साल पूर्व तक दारमा व व्यास घाटी सड़क से नहीं जुड़ी थीं। ऐसे में ग्रामीण अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक अपने पशुओं के साथ निचली घाटियों की ओर पलायन भी कर जाते थे। अब सड़क पहुंचने के बाद शीतकाल में भी आवागमन संभव भी हो पाया है। कई ग्रामीणों ने होम स्टे शुरू किए हैं, जिससे सर्दियों में भी पर्यटक यहां पहुंचने भी लगे हैं।
हालांकि अधिक बर्फबारी की स्थिति में मार्गों पर अस्थायी ग्लेशियर भी बन जाते हैं, जिससे यातायात बाधित भी हो जाता है। पिछले कुछ वर्षों से कम बारिश व बर्फबारी के कारण ऐसे ग्लेशियर नहीं बन पा रहे हैं, जिससे आवाजाही भी बनी हुई है।
होम स्टे संचालकों में खुशी, रोजगार की उम्मीद
होम स्टे संचालक संजय जंग का कहना है कि सड़क खुली रहने से पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है और आने वाले समय में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हालांकि, शून्य से नीचे तापमान व तेज सर्द हवाओं के बीच पर्यटकों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती भी बना रहता है।
मुनस्यारी में फिर बर्फबारी, स्कूलों में अवकाश
मुनस्यारी क्षेत्र में मंगलवार देर शाम फिर से बर्फबारी हुई, जिससे कई मार्ग बंद भी हो गए और कुछ स्थानों पर वाहन फंस भी गए। मौसम विभाग द्वारा हाई अलर्ट जारी किए जाने के बाद जिलाधिकारी ने बुधवार को कक्षा 12 तक सभी विद्यालयों में अवकाश भी घोषित कर दिया है। जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अब भी बर्फबारी का दौर जारी ही है।