जंगलों में आग पर हाईकोर्ट सख्त, पर्यावरणविद अजय रावत से मांगे सुझाव — सरकार की लापरवाही पर जताई नाराज़गी
नैनीताल हाईकोर्ट में फायर सीजन के दौरान जंगलों में लगने वाली आग पर स्वतः संज्ञान याचिका व अन्य जनहित मामलों पर सुनवाई भी हुई। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत को अगले शुक्रवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुझाव देने के निर्देश भी दिए।
न्यायमित्र ने कोर्ट को बताया कि 2021 से अब तक सरकार को कई बार निर्देश दिए गए, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम ही नहीं दिखा। कोर्ट ने भी नाराज़गी जताते हुए कहा कि
- हर वर्ष जंगल आग से धधक रहे हैं,
- उच्च हिमालयी क्षेत्रों का तापमान बढ़ रहा है,
- बादल फटने की घटनाएं व जन–धन की हानि बढ़ रही है।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पानी रोकने के लिए खालें बनाई जाएं, उन्हें आपस में जोड़ा जाए व फायर लाइन की तरह उपयोग किया जाए।
न्यायमित्र ने कहा कि 2016 व 2017 में जारी गाइडलाइंस आज तक लागू ही नहीं हुईं। गांव स्तर पर आग बुझाने की कमेटियां बनाने के भी आदेश थे, लेकिन उन पर भी अमल ही नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने सरकार की लगातार लापरवाही पर चिंता जताते हुए मामले को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध भी किया है।