उत्तराखंड में 10,760 पंचायतें खाली, प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति पर अटका संशोधन

देहरादून – उत्तराखंड में ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायतों की स्थिति फिलहाल अस्थिर बनी हुई है। प्रदेश की 10,760 त्रिस्तरीय पंचायतें फिलहाल खाली ही हो गई हैं, क्योंकि प्रशासकों का 6 माह का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। अब इन पंचायतों में न तो चुनाव कराए गए हैं और न ही प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति संभव भी हो पा रही है। कारण है – पंचायती राज अधिनियम में संशोधन से जुड़ा तकनीकी पेच, जो हरिद्वार जिले के पुराने मामले से ही जुड़ा हुआ है।

प्रशासकों की नियुक्ति की समय-सीमा समाप्त

उत्तराखंड में पंचायती राज एक्ट के तहत यदि किसी कारण से पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं, तो सरकार 6 माह के लिए प्रशासक नियुक्त कर सकती है। इसी प्रावधान के तहत पिछले वर्ष राज्य की सभी पंचायतों (हरिद्वार को छोड़कर) में प्रशासक नियुक्त भी किए गए थे। लेकिन अब इनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है:

  • ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्त: 4 दिन पहले
  • क्षेत्र पंचायतों में कार्यकाल समाप्त: 2 जून को
  • जिला पंचायतों में कार्यकाल समाप्त: 1 जून को

अब सवाल यह है कि जब चुनाव अभी भी नहीं हो पाए हैं, तो प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति कैसे की जाए?

हरिद्वार का मामला बना बाधा

प्रशासकों की दोबारा नियुक्ति के लिए सरकार ने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन के उद्देश्य से एक अध्यादेश राजभवन भेजा है, लेकिन इसमें हरिद्वार का पुराना मामला ही आड़े आ रहा है।

2021 में हरिद्वार जिले में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद चुनाव नहीं कराए जा सके थे। तब भी 6 माह के लिए प्रशासक नियुक्त किए गए थे। कार्यकाल खत्म होने के बाद उनकी पुनर्नियुक्ति के लिए अध्यादेश भी लाया गया, लेकिन बाद में चुनाव कराए जाने के कारण यह अध्यादेश विधानसभा में पारित ही नहीं हुआ।

अब विधायी विभाग ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के हवाले से कहा है कि कोई अध्यादेश यदि एक बार लौटा भी दिया गया हो, तो उसे फिर उसी रूप में दोबारा पेश नहीं किया जा सकता। इसे संविधान के विरुद्ध भी माना जाता है। इसी आधार पर राजभवन से अध्यादेश पहले ही एक बार लौटा भी दिया गया है।

संशोधन के बाद फिर भेजा गया अध्यादेश

विधायी विभाग ने आवश्यक संशोधन कर अध्यादेश को फिर से राजभवन भी भेजा है, लेकिन इस बार इसकी स्वीकृति मिलना अनिश्चित भी नजर आ रहा है।

पंचायतों की संख्या पर एक नजर

  • ग्राम पंचायतें: 7478 (हरिद्वार की 318 को छोड़कर)
  • क्षेत्र पंचायतें: 2941
  • जिला पंचायतें: 341
  • कुल त्रिस्तरीय पंचायतें: 10,760

क्या कहती है सरकार?

राज्य सरकार का कहना है कि वह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पंचायत व्यवस्था को बनाए रखने के लिए काम भी कर रही है। यदि राजभवन से अध्यादेश को स्वीकृति मिलती है, तो प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति भी संभव होगी। अन्यथा, विधानसभा के माध्यम से विधेयक पास करवाने का रास्ता भी अपनाना पड़ सकता है।