क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) की टीम से क्रिकेट खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को अब मूल निवास प्रमाणपत्र भी दिखाना होगा।

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (सीएयू) की टीम से क्रिकेट खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को अब मूल निवास प्रमाणपत्र भी दिखाना होगा। मूल निवास प्रमाणपत्र के बिना कोई भी खिलाड़ी क्रिकेट नहीं खेल पाएगा। यह फैसला बीते गुरुवार को सीएयू की एपेक्स काउंसिल की बैठक में लिया गया।

ऐसे में अब आगामी सत्र 2024-25 से बिना मूल निवास के खिलाड़ियों का चयन भी नहीं किया जाएगा। अभी तक तो मूल निवास प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं था। वही सीएयू की इस फैसले से उन खिलाड़ियों को नुकसान होगा, जो मूल रूप से दूसरे राज्य के होकर भी उत्तराखंड के लिए खेल रहे थे।

इसके लिए सीएयू ने संबद्ध सभी जिला संघों को मेल भेजकर आगामी 2024-25 के सत्र से ट्रायल के लिए मूल निवास प्रमाणपत्र को अनिवार्य करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

सीएयू के सचिव महीम वर्मा ने बताया, बिना मूल निवास के खिलाड़ी ट्रायल के लिए पंजीकरण नहीं कर पाएंगे। अभी तक बीते 3 साल से उत्तराखंड में रहकर पढ़ाई कर रहे छात्रों का शिक्षा के आधार पर चयन किया जा रहा था। लेकिन अब सिर्फ वहीं खिलाड़ी टीम में शामिल होंगे, जिनके पास उत्तराखंड का मूल निवास प्रमाणपत्र होगा।

सीएयू के इस फैसले को पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश पहले ही लागू कर चुका है। हालांकि, लंबे समय तक नियम के आधार पर चयन करने के बाद हिमाचल ने इस नियम को हटा भी दिया है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है, इस नियम से उन खिलाड़ियों को मौका नहीं मिल पाएगा, जो बीते 3 साल से उत्तराखंड से खेलने का सपना देख रहे थे।

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